जीवन में सुख-समृद्धि भरने वाला महापर्व दिवाली …

दिवाली का त्योहार, जिसे दीपोत्सव या रोशनी का पर्व भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में सबसे बड़ा और सबसे पवित्र माना जाता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वह शुभ दिन है जब हम अपने घरों में धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी और बुद्धि के देवता भगवान गणेश का विधिवत आह्वान करते हैं।
यह माना जाता है कि दीपावली की रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो भक्त उन्हें शुभ मुहूर्त में, पूर्ण पूजा विधि के साथ पूजते हैं, उनके घर में माँ स्थायी रूप से वास करती हैं। हमारे प्यारे देशभर में इस पर्व का विशेष उत्साह होता है। घर-घर में रंगोली सजाई जाती है और पारंपरिक तरीके से लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाता है। चूंकि यह पूजा प्रदोष काल और स्थिर लग्न में ही सबसे फलदायी होती है, इसलिए पूजा का सटीक समय जानना बहुत जरूरी है।
यदि आप भी अपनी तिजोरी को साल धन दौलत से भरा हुआ रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि माँ लक्ष्मी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे, तो यहां दिए गए सटीक समय के अनुसार सर्वश्रेष्ठ Diwali Puja Vidhi 2025 और शुभ पूजा मुहूर्त, आवश्यक सामग्री की लिस्ट और स्टेप-बाय-स्टेप संपूर्ण पूजा विधि विस्तारपूर्वक आसान भाषा में गई है। इस जानकारी को ध्यान से पढ़ें और दिवाली पूजा धूमधाम से करें। यह पूजा विधि आपको मां लक्ष्मी का ढेर सारा आशीर्वाद, धन दौलत, सुख शांति एवं समृद्धि प्रदान करेगी।
Diwali Kab Hai 2025 – दिवाली 20 अक्टूबर को है या 21 अक्टूबर को
इस वर्ष 2025 में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 बार सोमवार को मनाया जाएगा, लेकिन इस बार अधिकतम लोग दिवाली कब है 2025 में? इसको लेकर बहुत ज्यादा असमंजस में है। हम आपका यह संदेह दूर करते हुए एकदम सही एवं सटीक आवश्यक जानकारी यहां उपलब्ध करवा रहे है, जिससे आप आसानी से समझ सकते है कि आखिर दिवाली का त्योहार इस बार कब है।
Diwali Puja 2025 Subh Muhurat – दिवाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
दिवाली पूजा का सबसे शुभ समय वह होता है जब प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय और वृषभ स्थिर लग्न यानी स्थिर धन का लग्न एक साथ मौजूद होते हैं।
- दीपावली मुख्य लक्ष्मी पूजन: 20 अक्टूबर 2025, वार सोमवार
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर, दोपहर 03:44 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर, शाम 05:54 बजे
- लक्ष्मी पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (वृषभ स्थिर लग्न): शाम 07:16 बजे से रात 09:13 बजे तक (1 घंटा 57 मिनट)
- प्रदोष काल (पूजा का शुभ समय): शाम 05:54 बजे से रात 08:25 बजे तक: (2 घंटा 31 मिनट)
- वृषभ काल पूजा मुहूर्त: 7:08 बजे से 9:03 बजे तक
- निशिता काल मुहूर्त (मध्यरात्रि पूजन): रात 11:46 बजे से 21 अक्टूबर को रात्रि 12:37 बजे तक (51 मिनट)
Diwali Puja Vidhi 2025 शुभ चौघड़िया, शुभ मुहूर्त (व्यापारियों के लिए विशेष)
व्यापारी वर्ग के लिए लक्ष्मी पूजा करने का सर्वश्रेष समय एवं शुभ चौघड़िया यहां दिया गया है, इसके अनुसार आप निर्धारित समय पर अपने दुकान, एवं जो भी आपका व्यापार स्थल है वहां पूजा कर सकते है:
| चौघड़िया का समय | चौघड़िया का प्रकार | लाभ क्या है |
| दोपहर | दोपहर 01:30 बजे से 03:04 बजे तक | लाभ (व्यापार में वृद्धि) |
| शाम/रात | रात 10:37 बजे से 12:12 बजे तक | लाभ (स्थिर व्यापार और धन वृद्धि) |
यह मुहूर्त राजस्थान की राजधानी जयपुर के स्थानीय पंचांग पर आधारित है। अपने शहर के सटीक समय के लिए आप अपने स्थानीय पंडित से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि राज्यवार मुहूर्त एवं चौघड़िया में कुछ फर्क हो सकता है।
दिवाली पूजा करना क्यों जरूरी है, इससे क्या होता है
दीपावली केवल दीयों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अज्ञान पर ज्ञान, अंधकार पर प्रकाश और अभाव पर समृद्धि की जीत का उत्सव है। इस दिन हम तीन मुख्य देवी देवता का आह्वान करते हैं:
- प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश: बुद्धि, शुभता और विघ्नहर्ता।
- मां लक्ष्मी: धन, समृद्धि और वैभव की देवी।
- माता सरस्वती: ज्ञान और कला की देवी (व्यवसायी वर्ग के लिए विशेष)।
इन तीनों का एक साथ पूजन करने माना जाता है आपके घर में न केवल धन आता है, बल्कि उस धन का सदुपयोग करने की बुद्धि और ज्ञान एवं सद्बुद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है।
Diwali Puja Vidhi 2025 – दिवाली पूजा की तैयारी, पूजा सामग्री और स्थापना
मां लक्ष्मी पूजा की सफलता के लिए, मुहूर्त के साथ-साथ तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जिसके लिए आप यहां दी गई आसान सी विधि का पालन कर सकते है:
दिवाली पूजा सामग्री की लिस्ट:
- देव प्रतिमाएं: माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश (दायीं ओर), और माता सरस्वती की मूर्ति या चित्र।
- स्थापना: नई लाल या पीली चौकी, लाल वस्त्र, चावल या गेहूं।
- पवित्र जल: गंगाजल और पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद एवं गंगाजल का मिश्रण।
- श्रृंगार और वस्त्र: रोली, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, कलावा (मौली), इत्र, आभूषण एवं सोने या चांदी के सिक्के (सिक्के यदि हो)।
- पुष्प: कमल का फूल माँ लक्ष्मी जो का सबसे प्रिय, गुलाब, गेंदा।
- दीप और धूप: शुद्ध घी का दीपक, जो रात भर जलना चाहिए, धूपबत्ती।
- नैवेद्य (भोग): खील, बताशे, गन्ना, सिंघाड़ा, फल, मिष्ठान और विशेष रूप से कमल गट्टे।
- धन की वस्तुएं: नए बहीखाते या दुकान व्यापार की डायरी, चांदी या सोने के सिक्के यदि हो, नई झाड़ू, तिजोरी/गल्ला।
Diwali Puja Vidhi 2025 – आसन और कलश स्थापना विधि
- चौकी: एक स्वच्छ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
- कलश: चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर जल से भरा कलश स्थापित करें, जिसमें सुपारी, सिक्का, हल्दी और आम के पत्ते डालकर ऊपर नारियल रखें।
- देव स्थापना: कलश के दाईं ओर श्री गणेश जी और उनके दाईं ओर माँ लक्ष्मी और फिर एक ओर मां सरस्वती को स्थापित करें। (ध्यान दें: पूजन करने वाले व्यक्ति के अनुसार, लक्ष्मी जी हमेशा दाहिनी ओर होती हैं)।
जैसा कि इस फोटो में दिया गया है आप इससे समझ सकते है….
स्टेप-बाय-स्टेप Diwali Puja Vidhi 2025 In Hindi
पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त (शाम 07:16 बजे से) शुरू करने से पहले, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
1. संकल्प और शुद्धि:
- हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर अपना नाम, गोत्र और पूजा का उद्देश्य (धन, सुख-शांति) बोलकर संकल्प लें। इसके बाद स्वयं, आसन और पूजा सामग्री पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें।
2. गणेश पूजन (शुभ आरंभ):
- सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश का पूजन करें।
- उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं।
- रोली, चंदन का तिलक करें और दूर्वा (घास) अर्पित करें।
- मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
3. मां लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन:
अब मां लक्ष्मी का मुख्य पूजन शुरू करें, यह पूजन सोलह विधियों से किया जाता है:
- आवाहन और आसन: फूल लेकर माँ लक्ष्मी का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने का अनुरोध करें।
- स्नान: माँ को पंचामृत, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- वस्त्र और श्रृंगार: उन्हें वस्त्र (कलावा) और आभूषण अर्पित करें। उन्हें कमल का फूल (या गट्टा), इत्र, और कुमकुम/सिंदूर चढ़ाएं।
- दीप और भोग: घी का दीपक जलाएं, और खील-बताशे, गन्ना, फल और मिष्ठान का भोग लगाएं।
4. बहीखाता और तिजोरी पूजन:
- माँ लक्ष्मी के पास रखे बहीखाते, तिजोरी/गल्ला, सोने/चाँदी के सिक्के और कलम की पूजा करें। इन पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत लगाएं। यह धन को सही दिशा में लगाने और व्यापार में वृद्धि के लिए किया जाता है।
5. मंत्र जाप और कथा:
- शांत मन से 108 बार इस मंत्र का जाप करें (लाभ- धन प्राप्ति, सुख समृद्धि, सुख शांति):
‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।
परिवार के साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और दीपावली की कथा सुनें।‘
6. आरती और क्षमा प्रार्थना (समापन):
- अंत में, गणेश जी और माँ लक्ष्मी की आरती करें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगे। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें और बड़ों का आशीर्वाद अवश्य लें।
पूजा के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
- स्थायी दीपक: रात भर घी का दीपक जलाकर रखें ताकि घर में प्रकाश और सकारात्मकता बनी रहे।
- पुरानी झाड़ू का विसर्जन: पूजा के बाद घर की पुरानी झाड़ू को सम्मानपूर्वक विसर्जित कर दें और नई झाड़ू को शुभ मानते हुए अंदर लाएं। यह दरिद्रता दूर करने का प्रतीक है।
- खुशी का माहौल: इस दिन घर में किसी भी प्रकार का कलह या वाद-विवाद न करें, शांत और खुशहाल माहौल बनाए रखें।
- अगले दिन: अगले दिन सुबह स्नान के बाद लक्ष्मी जी को चढ़ाए गए खील-बताशे और प्रसाद को घर के सभी सदस्यों और पड़ोसियों में वितरित करें।
Diwali Puja Vidhi 2025 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
कमल गट्टा (कमल बीज) क्यों चढ़ाए जाते हैं?
कमल गट्टा सीधे माँ लक्ष्मी से जुड़ा है, क्योंकि वह कमल पर विराजमान हैं। इन्हें अर्पित करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में स्थायी धन का वास होता है।
दिवाली पर नई झाड़ू खरीदने का सही समय क्या है?
दिवाली से पहले, विशेष रूप से धनतेरस, इस साल 18 अक्टूबर पर, नई झाड़ू खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। इसे पूजा के दिन इस्तेमाल के लिए रखें।
लक्ष्मी पूजा के समय कौन सा रंग पहनना शुभ होता है?
लक्ष्मी पूजन के दौरान लाल, पीला, या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, काला, नीला या गहरा भूरा रंग पहनने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी प्रचलित धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणना और हिंदू पंचांग पर आधारित है। पूजन से संबंधित किसी भी संदेह या विशिष्ट विधि के लिए, कृपया अपने स्थानीय पंडित से परामर्श लें। इस विस्तृत Diwali Puja Vidhi 2025 और सटीक मुहूर्त के साथ, हमें पूरी उम्मीद है कि आपकी दिवाली शुभ और मंगलमय होगी।